
छल से काम न चलता है
प्रेम न बल से डिगता है
डरा-डरा निश्चर दल हारा
हार गया लंकेश भी प्यारा
डिगा न पाया सिय का सत
प्रेम यही तो होता है
अमर सदा जो रहता है।
डॉ.उमा रानी दुबे
जयपुर, राजस्थान

छल से काम न चलता है
प्रेम न बल से डिगता है
डरा-डरा निश्चर दल हारा
हार गया लंकेश भी प्यारा
डिगा न पाया सिय का सत
प्रेम यही तो होता है
अमर सदा जो रहता है।
डॉ.उमा रानी दुबे
जयपुर, राजस्थान