साहित्य

प्रेम

डॉ.उमा रानी दुबे

छल से काम न चलता है

प्रेम न बल से डिगता है

डरा-डरा निश्चर दल हारा

हार गया लंकेश भी प्यारा

डिगा न पाया सिय का सत

प्रेम यही तो होता है

अमर सदा जो रहता है।

 

डॉ.उमा रानी दुबे

जयपुर, राजस्थान

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!