अँधेरे दिनों में कविता संग्रह का लोकार्पण, साहित्यकारों ने रचनात्मक सरोकारों पर किया मंथन
दि ग्राम टेडे/संवाददाता

फगवाड़ा। बिम्ब-प्रतिबिम्ब प्रकाशन द्वारा प्रकाशित तथा बरनाला के कवि विनोद अनिकेत के कविता-संग्रह अँधेरे दिनों में का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के सत्राध्यक्ष वरिष्ठ कवि एवं आलोचक आचार्य अशोक कुमार ने कहा कि कवि और कविता को अपनी भूमिका तलाशनी होगी तथा स्त्री-पुरुष के विभेद को कम करके देखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विनोद अनिकेत शांत मन के कवि हैं और उनका यह संग्रह दार्शनिक चिंतन, राजनीति, समाज तथा आर्थिक विसंगतियों को उजागर करते हुए पाठकों को आश्वस्त करता है।
दो सत्रों में आयोजित कार्यक्रम के प्रथम सत्र में पुस्तक केंद्रित चर्चा-परिचर्चा हुई। इस दौरान सिमर सदोष, डॉ. अजय शर्मा, पवन, डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री तथा दिलीप कुमार पाण्डेय सहित अनेक साहित्यकारों ने संग्रह की रचनात्मक विशेषताओं और समकालीन संदर्भों पर अपने विचार व्यक्त किए।
द्वितीय सत्र कविता दरबार के रूप में आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि एवं आलोचक तरसेम गुजराल ने की। उन्होंने कहा कि जब जीवन के लगभग सभी क्षेत्र राजनीति से प्रभावित हो रहे हैं, तब रचनाकारों को किसी भी रूप में तटस्थ नहीं रहना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. सरला भारद्वाज, मनोज फगवाड़वी, नीरू ग्रोवर, माला अग्रवाल माधवी, सपना, राधा रानी, श्रेया और देवेश पाण्डेय ने अपनी कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया।
कार्यक्रम का स्वागत पंजाबी भाषा के कवि एवं कथाकार रवीन्द्र चोट ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. यश चोपड़ा द्वारा प्रस्तुत किया गया। समारोह में पंजाबी विरसा ट्रस्ट, फगवाड़ा की ओर से साहित्यकारों को उनके साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर प्रिंसिपल डॉ. गुरमीत सिंह पलाही ने साहित्यकारों की चिंताओं और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सफल संचालन अनुवादक एवं कवयित्री रूपिंदर कौर ने किया।
लोकार्पण से पूर्व कवि विनोद अनिकेत ने अपनी रचनाधर्मिता और वैचारिक प्रतिबद्धताओं पर विचार साझा करते हुए कहा कि पारिवेशिक जड़ताओं के विरुद्ध वैचारिक संघर्ष ही उनके लेखकीय जीवन का आधार रहा है। उन्होंने अपनी साहित्यिक सक्रियता का श्रेय अपनी पत्नी को देते हुए उनके सहयोग को अपने सृजन का महत्वपूर्ण आधार बताया।
कार्यक्रम में डॉ. बलवेन्द्र सिंह, संपादक राकेश शांतिदूत, अरविन्द पाण्डेय, शोधार्थी नेहा, आरती, प्रीति सहित शहर और आसपास के अनेक साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।




