
बीत गया जो साल, उसे एक याद बना कर छोड़ चले,
समय की बहती धारा में, हम नए मोड़ की ओर चले।
कैलेंडर की तारीखें तो बस एक निमित्त मात्र हैं,
असली बदलाव तो वो है, जो हम भीतर की ओर ढले।
सूरज की पहली किरण आज, कुछ खास संदेश लाई है,
ओस की बूंदों ने घास पर, एक नई चमक बिखेराई है।
हवाओं में घुली है खुशबू, नई उम्मीदों के फूलों की,
क्षितिज पुकार रहा है तुमको, मंज़िल पास आई है।
मत पूछो कि पिछले साल, तुमने क्या-क्या खोया है,
मत गिनो कि कितनी बार, ये मन तन्हा रोया है।
जो गिर गए सो गिर गए, अब उठकर धूल झाड़ो तुम,
देखो भविष्य ने तुम्हारे लिए, खुशियों का बीज बोया है।
नया साल एक कोरा कागज, कलम तुम्हारे हाथ में,
लिख दो अपनी नियति खुद, संकल्पों के साथ में।
ना रुकना है, ना थकना है, बस निरंतर चलते जाना है,
सूरज बनकर चमकना है, इस जग की काली रात में।
छोड़ो पुरानी कड़वाहट, और द्वेष की हर दीवार को,
गले लगा लो दुश्मन को भी, बदलो इस संसार को।
प्रेम ही केवल वो भाषा है, जो पत्थर को पिघलाती है,
बाँटते चलो खुशियाँ हरदम, और बढ़ाओ प्यार को।
सफलता की सीढ़ी चढ़ते हुए, जमीन को मत भूलना,
ऊँचाइयों को छूना जरूर, पर अपनी जड़ें मत भूलना।
गरीब की सेवा, बड़ों का आदर, और इंसानियत का धर्म,
यही है असली जीत तुम्हारी, ये संस्कार मत भूलना।
नया साल संकल्प का है, कुछ नया कर दिखाने का,
खुद को बेहतर बनाने का, और अंधेरों को मिटाने का।
उठो! कि वक्त पुकारता है, तुम्हारी शक्ति को आज,
ये समय है सोए हुए, अपने भाग्य को जगाने का।
मुबारक हो तुम्हें यह साल, खुशियों का अंबार हो,
हर दिन एक नया उत्सव, हर पल एक त्यौहार हो।
दुआ है यही कि हर किसी के, होंठों पर मुस्कान रहे,
नया साल तुम्हारे जीवन में, तरक्की का आधार हो।
डॉ. यल.कोमुरा रेड्डी
सहायक आचार्य एवं अध्यक्ष
हिन्दी विभाग
एस.आर.आर. शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय,
करीमनगर, तेलंगाना राज्य


