
नूतनता की शुभ बेला में,
मन उमंग से हर्षाया।
नूतन वत्सर द्वार खड़ा है,
नव उमंग भर के लाया॥
जीवन की सब बाधा विपदा,
तुरत तिरोहित हो जाए।
सुगम सुवासित जीवन हो अब,
सुख सुगंध से महकाए॥
सभी सुहानी खुशियों का पल,
नूतन पल्लव की छाया।
नूतन वत्सर द्वार खड़ा है,
नव उमंग भर के लाया॥
घर-आँगन में खुशियाँ बरसे,
अमन चैन मन को भाये।
पुष्पित हो फुलवारी निशदिन,
वसुधा में यौवन आये॥
दिव्य दिवस अब मन को भाया,
नवल उमंगे ले आया।
नूतन वत्सर द्वार खड़ा है,
नव उमंग भर के लाया॥
शब्द सुमन हम अर्पित करते,
गीत ख़ुशी के गाते हैं।
सुखद सुहावन अरु मनभावन,
छंद सुधा बरसाते हैं॥
दीर्घ आयु हो सबका जीवन,
सदा सुशोभित हो काया।
नूतन वत्सर द्वार खड़ा है,
नव उमंग भर के लाया॥
डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश




