
मक़्सद जिंदगी का मोहब्बत रखो
प्यार भी रखो जज़्बात भी रखो!!
दिलासा दे रहे हम तन्हाई को
रास्ते में कोई अच्छा हमसफ़र रखो!!
यह उड़ान है शायद गुरुर की
लेकिन पांँव अपने ज़मीन पर रखो!!
रास्तों की क़ैद में है मंज़िलों का कारवांँ
थोड़ा लक्ष्य साधकर क़दम रखो!!
नज़रों से गिरने वाले हैं चारों ओर
नजदीकियां उनसे वाजिब ही रखो!!
दिल के किसी कोने में तुम्हारी याद है
दिल तोड़ने में थोड़ी नफ़ासत रखो!!
उससे बढ़कर कोई मिला ही नहीं
रहनुमा सोच समझ कर रखो!!
रिश्तो में क्यों कर हो दूरियां
बात अपनी सोच समझ कर रखो!!
सब तेरे आने के मुंतज़िर हैं
महफ़िल से थोड़ी नाराज़गी कम रखो!!
इश्क़ हक़ जताने का नाम नहीं
प्यार को तुम बुलंदी पर रखो…
– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




