ओस भरे खेतों पर अपनी
फटी बिवाई लिए घूमता।
कोहरे पाले से बतिया कर
जो अनाज बालियां चूमता।
उस किसान को शत वंदन है
नये वर्ष का अभिनन्दन है।।
रिंच हथौड़ा लिए संड़ासी
रेल पटरियां पेंच ठोंकता।
खतरे से नित हाथ मिला कर
अनहोनी की बात रोंकता।
सह कर भी न करे क्रंदन है।
नये वर्ष का अभिनन्दन है।।
स्वच्छकार ले झाड़ू डलिया
जनता की गंदगी बुहारे।
स्वच्छ करे जीवन की बदबू
स्वस्थ रहें तब जीवन सारे।
छुए धरा होती चंदन है।
नये वर्ष का अभिनन्दन है।।
मजदूरों के श्रम सीकर जब
शीतलहर में मोती बनते।
खून मास का अर्क लेप कर
जब महलों में मंगल मनते।
मरुथल में उग आते वन है।
नये साल का अभिनन्दन है।।
सतीश चन्द्र श्रीवास्तव
रामपुर मथुरा जिला सीतापुर




