साहित्य

व्याप्त नववर्ष हर्ष,उत्थान हेतु शेष संघर्ष

एस के कपूर "श्री हंस"

1=
बीत गया है वर्ष किंतु संघर्ष शेष है।
अभी राष्ट्र जन-जन का उत्कर्ष शेष है।।
चलें मिला कर कदम प्रगति पथ पर।
सर्व क्षेत्र सुख शांति का प्रश्न शेष है।।
2=
संपूर्ण विश्व शांति का ये काम बाकी है।
साथ में लेकर आना जो नहीं राजी है।।
एक भविष्य एक धरा का संदेश है देना।
अभी नफरत कीआंधी पलटनी बाजी है।।
3=
जो ताना-बाना टूट गया उसे जोड़ना है।
विकास की राह पर दुनिया को मोड़ना है।।
वसुधैव कुटुंबकम् भाव जग में है जगाना।
हर कुटिल प्रथा की जंजीर को तोड़ना है।।
4=
मानव मंगल चांद सूरज तक पहुंच जाएगा।
ऊर्जा का भंडार भी शीघ्र रूठ आएगा।।
हमें प्रकृति बचाते हुए खोजने रास्ते नए-नए।
तभी विज्ञान अनुसंधान रंग नया लाएगा।।
5=
नई पीढ़ी में संस्कार संस्कृति भाव जगाना है।
जन-जन को राष्ट्र सम्मान का पाठ पढ़ाना है।।
सद्भाव समभाव की एक प्रीत रीत है बनानी।
धरती को स्वर्ग से भी सुंदर संसार बनाना है।।
रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।

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