साहित्य

पिता

ब्रह्मनाथ पाण्डेय' मधुर'

 

आसमान से ऊॅंचा जिनका है अस्तित्व।
है विराट ईश्वर सम जिनका शुचि व्यक्तित्व।।
दुनिया सारी अपनी है जिनके रहते।
मुझे हॅंसाकर मेरा दुख अपने सहते।।

मेरे सभी खिलौने सारी सुविधाएँ।
जूते, चप्पल स्वेटर जैकेट मालाएँ।।
अपने कितना पढ़े नहीं मालूम मुझे है।
मैं ज्यादा पढ़ पाऊँ हसरत खूब उसे है।।

वह विराट से भी विराट किरदार सरीखा।
हर मुश्किल से लड़ना जिससे मैंने सीखा।।
मेरी थाली में घी अपने सूखी रोटी।
मुझको पैजामा खुद तन पर पहने धोती।।

जिसने मुझको चमकाया है दिनकर जैसे।
जिसने मुझको महकाया है सरवर जैसे।।
जिसने मुझको फूल बनाने की कोशिश की।
मेरे अनहित की बातें नहीं जो हरगिज़ की।।

जीवन गाथा की मुझको किरदार बनाकर।
मुझको सुंदर किया रंग से रंग मिलाकर।।
ऐसा है जो भी सारी दुनिया में बढ़कर।
वह विराटता की मूरत साकार सुहृदवर।।

वही पिता साकार यहाँ भगवान रूप में।
जो मेरी रक्षा करता है शीत धूप में।।
उसको नमन करूँ निशि वासर हाथ जोड़कर।
जो मेरे हित सजग रहे हर काम छोड़कर।।

ब्रह्मनाथ पाण्डेय’ मधुर’
वार्ड नंबर-5 काॅंटी, मुहल्ला- ककटही,नगर पंचायत- मेंहदावल पोस्ट:- मेंहदावल, जिला- संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश , 272271
संपर्क सूत्र-6306859740
वाट्सएप नंबर-9450547791

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