साहित्य

नव वर्ष

डॉ पुष्पा सिंह

नव वर्ष स्वागत दिल से तुम्हारा
दिल में नई तुम उम्मीदें जगाना।

खुशियों से भरो दामन हमारा
अंतस से तम दूर भागना।

एक दूजे का बने हम सहारा
उर मैं प्रेम के दीप जलाना।

मिलकर रहे जमाना यह सारा
हर निराशा दुख दर्द मिटाना।

चारों ओर फैले उजियारा
दुल्हन सी यह धरा सजाना।

बहे प्रेम की निर्मल धारा
अपनेपन का पौध उगाना।

नारी सम्मान करे जग सारा
सूता का अधिकार दिलाना।

दमके युवा ज्यों चांद सितारा
पंखों में उनके शक्तिभरना।

भूखों का ना घटे निवाला
उनका संकट निवारण करना।

दीन के नयन भरो रंग गहरा
पहरा उदासी का उनसे हटाना।

रक्षा तुम सरहद पर करना
लहर लहर तिरंगा लहराना।

और नहीं कुछ तुमसे कहना
विश्व करे नित भारत वंदना।
डॉ पुष्पा सिंह

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