
“”पप्पू हो गया बी. ऐ पास,
माता रोतीं पापा उदास।
हाई स्कूल में करघा बिक गया,
इंटर में पैज़निया,
बी ऐ था तब बेच दिया,
चलती भई दुकानियाँ,
तब भी बाबू घर में बैठा,
मांगे पिज़्ज़ा पनियाँ,
उदास भई तब महतारी,
बोली मेरे सईया,
बेच दिया सब हांडी गगरी,
बेच दिया सब लोटा थारी,
अब किसकी है बारी,
बोलो–अब किसकी है बारी?
स्वरचित :डॉ नवीन मौर्या
“फायर बनारसी” काशी।




