
नव वर्ष है, मन में हर्ष है,
ऊंची उड़ान, बड़े सपने।
करना है पूर्ण,
दृढ़ संकल्प है।
बच्चा कहीं से आकर बैठा,
टोपी, जुराब साथ में रुमाल।
खुद सर्दी में ठिठुर रहा,
सस्ते में ले लो, दे रहा आवाज़।
शाम की रोटी का, कर लूं जुगाड़,
जाकर बनवा लूंगा दाल।
बिक जाए मेरा ये सामान।
नव वर्ष है, मन में हर्ष है।
कमलेश मुदगल ( नई दिल्ली)




