
नव पथ नव निर्माण के लिए
देखो यह वर्ष आया है।
मन में ज्योति कांति लिए
देखो यह नव वर्ष आया है।
मन में उल्लास की आशा लिए
तन की सुख समृद्धि के लिए ।
भावों का नया आगाज लिए
देखो यह नव वर्ष आया है।
होता हर पल आभास यही
पल्लवित होता हर पल मधुर।
मधुर मधुर मुस्कान लिए
देखो यह नव वर्ष आया है।
ऋतु गर्ग,सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल
स्वरचित मौलिक रचना




