साहित्य

अंधा बाॅंटे रेवड़ी अपने को ही देत – लोकोक्ति

मुकेश कुमार दीक्षित 'शिवांश'

अंधा बाॅंटे यहाँ रेवड़ी
अपने को ही देता,
ऐसा क्या करण दादा जी
और कोई न लेता।
सुन ले बेटा कान खोलकर
तुझे बताऊँ आज,
अपनों को ही लाभ दिलाता
मिल जाता जब राज।
अंधा बाँटे रेवड़ी , वाह,
कहते सारे लोग
बस अपने परिचित को देकर
खूब लगाता भोग।

मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदौसी
मो ०- 8433013409
दिनांक- 03-1-2026

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