साहित्य

व्यंग

फायर बनारसी

“”बोलो बन्दे मातरम,
भूखे, नंगे, मोहतरम,
अबला पर है बिपदा भारी,
पुलिस बूथ में उतरी सारी,
रेल में जाती बजती सिटी,
बस के ऊपर करती पीटी,
कोर्ट में अफसर अलग बुलावे,
जज के नाम पर ख़ूब डरावे,
पीसी जात अबला बेचारी,
सहती है सारे अभियोग,
कहाँ गया महिला आयोग?
स्वरचित :फायर बनारसी, काशी।

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