साहित्य

  • गज़ल

    यह प्रभु की सरकार हमारा क्या है। उनका ही संसार हमारा क्या है।। करिए सूरज को नमन सदा मन से।…

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  • ग़ज़ल- राधाकृष्ण सा प्रेम

      ना खोल वो पुराने खत , उन्हें बंद ही रहने दो ना राज है जो तेरे मेरे बीच में,…

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  • यादों का शहर

      मुद्दतों बाद दिल को सुकून का बहाना मिला था, वीरान सी धड़कनों को कोई एक नाम मिला था। खामोश…

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  • प्यार का खुमार

    प्यार का खुमार चढ़े अपनों को देख देख दूसरों को देख देख ना मुंह को फुलाइए। चाहते हो प्यार पाना…

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  • विश्व भारती-अष्टादश-मंजरी

    ‘विश्व हिन्दी दिवस’ के संदर्भ में माँ भारती के चरणों में 18 दोहों का पुष्प-गुच्छ प्रथम वंदूँ माँ भारती, ज्ञान…

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  • परिवेश

      न्याय नहीं है आज जहांँ में, असत जीतता सत हारा। दुख का पारावार नहीं है, थम सी गई अश्रु…

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  • जाने कौन से सफ़र का

    जाने कौन से सफ़र का कौन मुसाफ़िर होगा, कौन होगा यहाँ नाकाम, और कौन सफलता में शामिल होगा। अगर लड़ेंगे…

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  • गजल

      पैसे की सरकार हमारा क्या है, पूँजी का अधिकार हमारा क्या है। अपना घर हो उजियारा चाहे, जनता हो…

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  • स्वर्ण-तमगे का सन्नाटा

    घर से निकला था जो सपनों को उठाए, न कोई, पाँच बरस बाद भी हाल पूछ पाए, न कोई। जेब…

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  • फूहड़ता की नंगनाच

    रीलों ने मर्यादाओं के , सारे बंधन तोड़ दिये। फूहड़ता की नंगनाच ने,हाथ शर्म से जोड़ लिये।। अनुसूया सीता सावित्री,धर्मग्रंथ…

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