साहित्य
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आस्तीन का सांप – मुहावरा
पोते ने दादा से पूछा, दादा बात बताएं, आस्तीन में सांप यहाँ पर पाले कैसे जाएं? दादा बोले मित्र बनाकर…
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रात
भोर लालिमा जब छा जाती, सारा जग तब प्रमुदित होता। अपनेपन के लिए भावना, अरुणोदय तम को है धोता।। निकल…
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रात
भोर लालिमा जब छा जाती, सारा जग तब प्रमुदित होता। अपनेपन के लिए भावना, अरुणोदय तम को है धोता।। निकल…
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शबरी
शबरी जयंती पर विशेष 8 फरवरी राम नाम का जाप करे वह, दिन हो चाहे रात। कृष्ण पक्ष फाल्गुनी सप्तमी…
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पुस्तक समीक्षा मंथन का निष्कर्ष
छंद काव्य का आत्मानुशासन और रस का दुर्लभ संतुलन है, जहाँ काव्यात्मक स्वतंत्रता नियमों के भीतर रहकर अधिक प्रभावशाली हो…
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सीमाएँ
सीमाएँ है आईने की भी जो सब कुछ नहीं बताता जो सामने आता है उसके उसको वैसा ही दिखा देता…
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सूर्योदय
जब धरा के अंक में,करता रवि अठखेलियाँ । तब चमक उठते शिखर है,और पर्वत श्रेणियाँ | जब नवल अरुणिम सी…
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तुम थी तो सब कुछ था
तुम थी तो नव वर्ष था दिन था, दोपहर थी शाम थी और रात थी सब का अहसास था तुम…
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ग़ज़ल
भूख गरीबी बेकारी के दिन देखें हैं। मैंने अपनी लाचारी के दिन देखें हैं। जीवन के सपने सब चकनाचूर हुए,…
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यादों का सौदा
जहां हमारा जन्म हुआ था,जहां लिए किलकारी। जिसके आंगन नहला नहला,पुलकित थी महतारी।। आज उसीघर पर लिक्खा है-यह मकान बिकाऊ…
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