साहित्य
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अंगुरी पकड़ के पहुंचा पकड़े
अंगुरी पकड़ के पहुंचा पकड़े को बेताब आज दुनिया सारी, भाई,बहन समाज को छोड़ो,ये छोड़ रहे हैं बप्पा महतारी, चिंता…
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निर्मल वाणी(दोहे)
निर्मल वाणी बोलिए,और बाँटिए प्यार। गले लगाकर दीन को,करिए सद्व्यवहार।। प्यार बढ़े संसार में, घटे घृणा दुर्भाव। निर्मल मन सबका…
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ठंकड बढ़ने लगी
ठंडक धीरे-धीरे बढ़ने लगी, रिश्तों की सिहरन उतरने लगी। धुंध इतनी घनी छाई है राहों पर, कि सच का…
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एक वर्ष जीवन कम हुआ आज
आज मुझे नव स्फूर्ति मिल रही है, नव जन्म वर्ष में प्रवेश कर रहा हूँ, उम्र का एक वर्ष गिनती…
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ये गरीबी क्यों होती हैं
ये गरीबी क्यों होती है, कोई पूछे तो बताना, महलों की नींव में दबा है, झोपड़ों का अफ़साना। कोई सोता…
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रात
भोर लालिमा जब छा जाती, सारा जग तब प्रमुदित होता। अपनेपन के लिए भावना, अरुणोदय तम को है धोता।। निकल…
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मेरे एहसास
मेरे हिस्से अगर कुछ आया, तो बस कल्पनाओं की उड़ान आई, और प्रतिक्षाओं की लंबी राहें, जो हर पल बस…
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पुनर्जन्म भी होता है
कर्मानुसार होता रहता है,हरेक प्राणियों का पुनर्जन्म। आत्मा कभी मरे न वो,अजर अमर अविनाशी जन्म।। लखचौरासी योनियों में,दिन-रात विचरण करे…
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गजल
सुबह की रोशनी कहती है सच अब तो सना होगा, अँधेरों के सफ़र का आज ही पर्दा उठा होगा। नया…
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हिसाब किताब
क्या खोया, क्या पाया, ये सवाल बहुत पुराने हैं, पर हर साल के अंत में ये और भी बेमाने हैं।…
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