साहित्य

  • विश्वास

      विश्वास की डोरी जितनी नाजुक, उतनी ही मजबूत होती है, विश्वास हो साथ,तब जुड़ता है कोई, अपमानित हो भाव,…

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  • जल,जंगल, ज़मीन

    बचे रहें ये जल, जंगल, ज़मीन, इनके बीच बसते रहें वे बच्चे – जो बिछाते हैं धरती, ओढ़ते हैं गगन,…

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  • दिल की आरजू

    मचल रहा है मेरे दिल की  आरजू गीत मिलन की गाओ री   कलियाँ अय चंचल अल्हड़ उड़ती      हवा…

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  • वै.वि.व कर्म ..२

    आदि सृष्टि अमैथुनी सृष्टि है,सप्त ऋषि हैं इसके आदि प्रधान। वंश वृद्धि कर विस्तार को करता,देकर रति-काम काउपादान।। प्रजा- वृद्धि…

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  • व्यंग

    “”पप्पू हो गया बी. ऐ पास, माता रोतीं पापा उदास। हाई स्कूल में करघा बिक गया, इंटर में पैज़निया, बी…

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  • संस्कार

    हो संस्कार घरौंदा अपना। पुरुखों का पूरा हो सपना।। बच्चों को भी राह दिखाना। अपने कुल की रीत निभाना।। संस्कारी…

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  • लक्ष्मी का गुप्त वास: एक सीख

    सोमदत्त अपने शहर का एक प्रतिष्ठित व्यापारी था। व्यापार में सब कुछ ठीक था, लेकिन पिछले कुछ समय से घर…

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  • आसान नहीं इंसान बन जाना

    आसान नहीं होता इतना, जन्म ले इंसान बन जाना । होते हैं संग हमारे अपने ही कर्म और व्यवहार सदा।…

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  • इच्छाएं

    इच्छाएँ जाने क्यों हो जाती हैं चुपचाप कहीं गुम, होठों पर मुस्कान रखकर, आँखों में रह जाता है नम। जो…

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  • मेरी कवितायें

    मेरी कवितायें आह से निकलती हैं खोखलापन नहीं कोई राग द्वेष नहीं सीधे सरल लिबास में मधुर भावना लिये कोमल…

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