साहित्य

  • गाँव पर फायकू

    1 खेत खलियान लहराए आज इनार का संगीत तुम्हारे लिए 2 बरगद वाली गहरी छाँव पीपल की धुन तुम्हारे लिए…

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  • लालच बुरी बला है..(बाल-कहानी)

    एक समय की बात है, एक किसान ने अपना गेहूं बोरे में भरकर गोदाम में रख दिया। घर में रहने…

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  • सर्द दिसम्बर की हवा

    सर्द दिसम्बर की हवा, शीतलता चहुँओर। दिनकर निकले देर से, प्राची मंडल छोर॥(१) कुहरे की चादर लिए, वसुधा है अति…

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  • प्रकृति

    प्रकृति पोषती जीव, मातृ सम हर क्षण प्यारे।। बिना किए कुछ चाह, चंद्र सूरज अरु तारे‌‌।। समझोगे कब बात ,वार…

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  • संगम

    आओ मिल जाऍं हम तुम संग में , दो दिलों का यह संगम हो जाए । बह जाए प्रेमाश्रुओं की…

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  • जीवन

    जीवन ! एक सफ़ीना है । कभी लहरों से जूझना । कभी तूफ़ा से टकराना । कभी बहाव के विपरीत…

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  • मैं कर्तव्य-मार्ग पर चलूंगा ही

    जब तक शोषक और शोषित है, मैं इनका द्वंद्व लिखूंगा ही। चाहे दुनिया मुझे जो कहले, मैं कर्तव्य-मार्ग पर चलूंगा…

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  • दिसंबर की अंतिम हलचल

    दिसंबर की ये अंतिम हलचल, दिल में कोई दीया जलाए। बीते लम्हों की थके तरंगें धीमे–धीमे पास बुलाएँ। दिसंबर की…

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  • निरंकार

    निरंकार वह ज्योति है, जिसमें कोई आकार नहीं। सब स्वरूप उसी से जन्में, पर उसमें ही विस्तार नहीं। जगत का…

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  • आ गई है सर्दी

    थोड़ी गर्माहट लेकर थोड़ी ठंडक लेकर कहीं मन को लुभा रही है तो कहीं मन को तड़पा रही है ।…

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