साहित्य
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पतंग उड़ी रे
उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे, लेके रंगों की बयार उड़ी उड़ी रे। लाल,हरी,नीली,पीली और बसंती, रंग-बिरंगी लम्बी-छोटी पूँछों…
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कुरुक्षेत्र में गीतायन का भव्य लोकार्पण, ऋतु गर्ग की रचना “गीता का दिव्य ज्ञान” को मिला विशेष स्थान
अंतरराष्ट्रीय साहित्य कला संस्कृति न्यास साहित्योदय के तत्वावधान में अखण्ड गीता पीठ आश्रम, कुरुक्षेत्र में आयोजित दो दिवसीय गीतायन साहित्य…
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यथार्थ से परिचित कराती कहानियॉं – वरेण्य (कहानी संग्रह)
पुस्तक समीक्षा –वरेण्य (कहानी संग्रह) लेखक-श्री नन्द लाल मणि त्रिपाठी ‘पीताम्बर’ समीक्षक:डॉ. वासुदेवन ‘शेष’ प्रकाशक –कश्यप पब्लिकेशन, बी-15, जी 1,…
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वंदना माँ वीणावादिनी
श्वेत कमल पर विराजित माँ, हंस संग करतीं पथ-प्रदर्शन। शुभ्र वसन में ज्योति स्वरूपा, ज्ञान-सुधा का करतीं सिंचन। वीणा की…
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बेटियाँ
सृष्टि के निर्माण को, होती हैं बेटियाँ, कूड़े के ढेर को नहीं, होती हैं बेटियाँ। बेटों का क्या, घरबार बसाकर…
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जीवन का रिश्ता
रिश्तो को जीना होता है ज़हर मिले तो पीना होता है!! मेरी बात कहांँ तक पहुंँची रिश्तो को कहना होता…
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दिन बढ़ती जा रही
दिन-दिन बढ़ती जा रही, रिश्तों में तकरार। बढ़ी आपसी दूरियाँ, आँगन में दीवार।। आत्ममुग्धता बढ़ गई, बदले सोच विचार। कुंठित…
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भैंस के आगे बीन बजाना – मुहावरा
पोता बोला दादा जी से इसका तुम अर्थ बताओ, क्यों मानव कहते यहाँ, भैंस के आगे बीन बजाओ। न समझने…
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मुक्तक
न जाने कितने रफू किये हैं हमने इस नाजुक दिल पर । मुस्कानों के सिले हैं पेमद हमने इस नाजुक…
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चमकते रेत को
चमकते रेत को वो लोग आब लिखने लगे। बुझे चराग को भी आफताब लिखने लगे।। नहीं जो जानते मतलब रईस…
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