साहित्य
पुरुष और नारी दो ध्रुव जैसे


जीवन का संतुलन बनाते, बिना एक-दूसरे अधूरे रह जाते।
स्नेह और सम्मान के साथ, हर राह आसान बनाते।
नारी की मुस्कान में बसी, जगत की रोशनी सारी,
पुरुष का साथ मिले जब, बनती नयी सुबह प्यारी।
दोनों की साझी मेहनत, समाज को आगे बढ़ाती,
दोनों की समझदारी, हर क़दम पर राह सजाती।
न ऊँचा कोई, न नीचा कोई, बराबरी का हो मान,
साथ कदम बढ़ाएँ जब, खिल उठे जीवन का स्थान।
सम्मान, विश्वास और प्यार, रिश्ते को सदा संवारें,
पुरुष-नारी हाथ में हाथ, सपनों की उड़ान पायें।
जब ध्रुव मिलते हैं दो, बनता सुंदर संसार,
सफलता और खुशियाँ हर पल, साथ चलने का उपहार।
अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)




