
हर समय तुम होती हो
किस पल की बात करूं
हर शाम तुम संग मुस्काता हूं
किस शाम की में बात करूं
हर रात यादों में बितती
किस रात की मैं बात करूं
हर सृजन मैं रहती हो
किस लेखन की बात करूं
तुम हो तो यह सौंपने हैं
किस सोपान की बात करूं
हर सोच तुम ,से शुरू होती
किस सोच की ,बात करूं
हर धड़कन तेरा गीत है
किस धड़कन की बात करूं
सारी दुनिया में अनमोल हो
किस अनमोल की बात करूं
हर दिन रात रहती हो तुम
किस अहसास की बात करूं
अहसास तले हो जाता हूं
किस वक्त की बात करूं
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




