साहित्य

(लघु कथा) हर दिन की अद्भुत खुशी 

डॉ रामशंकर चंचल 

यह है मेरा गांव बामन सेमलिया और उसके जेसे सैकड़ों गांव हजारों लोग

कमाल है साहब, जिंदगी की परिभाषा इनके पास सचमुच अद्भुत है जीवन मंत्र, यंत्र, चलो देखो बताता हूं, हर दिन कड़ी मेहनत और परिश्रम के बीच मिला धन राशि को पा कर अपार हर्ष समेटे चल देता है छोटी सी नमक मिर्च की दुकान पर दस्तक दे फिर कभी कभी ब्याज लेता है ओर शाम को घरवाली अर्थात पत्नी

उसकी मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी के चंद टुकड़ों जला कर खाना बनाती हैं और साथ खबर कभी कोई भीली गीत गुनगुनाती है जिसे उसका पति

मांगू बढ़े ध्वनि से सुनता है और वह भी उस गीत की आगे की लाइन गुनगुनाते मत हो जाता है

देखते ही देखते खाना तैयार हो जाता है मक्का की गरम रोटी और लहसुन की चटनी बड़े संवाद से पेट भर खा कर शामिल को झोपडी के पास बाहर लगे लकड़ी के एक खंभे के पास छोटे से लीम के या बबूल के पड़े नीचे बैठ कर बीड़ी के दो चार कश मारता है और मस्त हो जाता हूं अपने आज के कर्म श्रम और दिन पर इसी मस्ती को समेटे लेता है एक अच्छी नींद और सुबह जल्दी उठ कर अपने खेत में पानी और खाद डाल कर फिर आज की मजदूरी पर चल देता है

रोज रोज़ अद्भुत खुशी का अहसास करता है जीता हूं कमाल की खुशी है उसके चेहरे पर अद्भुत तेज है जिंदगी की खुशहाली की जो शहरी लॉग में अथाह सूख सुखद के बाद भी उनके चेहरे पर देखे मुझे वर्षों बीत गए

देखी न यह है सुखद और खुशहाल जिंदगी की परिभाषा एकदम सत्य लिए पर पड़ा लिखा आदमी अपने अहम में जीता आदमी सारी जिंदगी खुशी और खुशी की तलाश में भटकता प्राप्त खुशी की श्रद्धांजलि देता हुआ जी रहा है सालो से तलाश रहा है कोई अद्भुत खुशी की जिसका कोई अंत नहीं है हर खुशी उसे दूसरी खुशी की तलाश में भटकती है और वह केवल डोड रहा है इसी तरह दौड़ता रहेगा और अंत होगा जीवन अंत , खेर राम जाने, राम की महिमा

हम तो उन से सीखे हैं और आप को जीवन की परिभाषा बता रहे हैं बाकी अप जाने पर हां कभी ऊपर वाले ईश्वर को दोष न दें उसने सब कुछ दो है दोनों हाथ पैर, आँखें नाक सब कुछ जीना है आप को कैसे यह आप जाने ,,

डॉ रामशंकर चंचल

 

झाबुआ मध्य प्रदेश

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