आलेख

मैंने कृतियां निकाल तीर्थ यात्रा की और सारे विश्व को भोज कराया

डॉ रामशंकर चंचल

अक्सर लोग उम्र के 60 या 65 में उसके बाद तीर्थ यात्रा करते हुए जीवन को सार्थक मानती है और लाखों रुपया खर्च कर आकार फिर अपने समाज को कुछ अपनों को भोज कराते हुए सुख सुकून महसूस करते हैं , अच्छा है इसे विषय पर कुछ नहीं कहना चाहता हूं सब कि अपनी सोच अपनी जिंदगी

में मंदिर में पत्थर के भगवान का समर्थक कभी नहीं रहा, कबीर की सोच और चिंतन को लिए जी रहा हूं
मैं कभी अपना शहर झाबुआ छोड़ कर बाहर नहीं गया सालों से , रिश्ते नाते शादी ब्याह सब कुछ मुझे सदा ही व्यर्थ लगा नहीं जानता क्यों
मैने अपने बच्चों की शादी में भी कभी बरात में नहीं गया केवल एक दिन अपनी उपस्थिति देता था जिस दिन सादी होती थी क्यों नहीं जानता हूं
ऐसा हूं ऐसे में सुख सुकून महसूस करता हूं यही वजह है जीवन में कुछ धन राशि अथाह कमाया सारी जिंदगी बच्चों को तमाम खुशी देने का प्रयास किया सोचा कुछ धन राशि मेरे जीवन पूंजी जीवन सृजन जीवन भर के अथाह लेखन को अथाह प्रकाशन हुए उसे कृति में निकाल देश को विश्व पटल को भेंट कर दूं इतना लिखा हुआ पांडुलिपियां है कि आज भी लिखना बंद कर दूं तो भी पांचस कृतियां और सम्पूर्ण विश्व पटल पर दस्तक दे सकती हैं खैर ईश्वर जाने राम जाने आगे की

बस वैसे ही बताना चाहता हूं कि मैंने कृतियां निकाल तीर्थ यात्रा का सुखद अहसास किया सुख सुकून
महसूस किया और ईश्वर ने पूरा साथ दिया नहीं जानता कौन ईश्वर है क्या नाम हैं कहां निवास है इतना जनता है कोइ है जो सदा साथ है मेरे हर पल उसे अपने साथ पास पाता हूं और बहुत कुछ कर रहा हूं आगे भी वो जाने जो सदा साथ है
यह मेरे सैकड़ों कृतियों जो अथाह धन राशि भी दे गई जीवन में बाल साहित्य लेखन में लाखों रुपया कमाया है सत्य है ईश्वर आशीष है
आज मात्र कुछ धन राशि लगा विश्व पटल को 15 वीं कृति भेंट कर सुखद अनुभव किया है जो धन ईश्वर ने चाहा तो कभी भी ब्याज सहित लौटा सकता है नही भी दे तो कोई भी दुःख नहीं जीवन में कपड़े पहनना तीर्थ यात्रा करना मौज मस्ती आदि आदि सैकड़ों सुखों से कोसों दूर रहा हूं लाखों रुपया जहां लोग जीवन में लगा देते हैं

धन्य है जीवन कि ईश्वर ने मुझे यह कार्य हेतु चयन कर सदा ही अच्छी सोच त्याग को जिंदा रखा है और मुझे सक्रिय रखें ऊर्जा और आशीष दे बहुत अच्छा नेक कर्म पथ पर दस्तक दे जीवन पूंजी जीवन सार्थक कर दिया है प्रणाम उस ईश्वर शक्ति को प्रणाम उस ईश्वर रूह को कुछ अपनों को जो सदा ही साथ द दे अच्छा कर्म कर मुझे से सुखद अहसास कराया धन्य हुआ सभी मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्राणियों को देश और विश्व के इंसानो को सतत् प्रणाम करता हूं

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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