
पंडित अटल बिहारी वाजपेयी : राष्ट्र प्रथम की जीवित प्रतिमा जब भी भारत माता के सच्चे सपूतों की चर्चा होती है,तो श्रद्धा से सबसे पहले जिस नाम का स्मरण होता है
वह नाम है पंडित अटल बिहारी वाजपेयी का अटल जी केवल एक राजनेता नहीं थे,वे विचार थे, संस्कार थे,
और भारत की आत्मा की सशक्त आवाज़ थे।वे सत्ता में भी विनम्र रहेऔर विपक्ष में भी मर्यादित उनकी वाणी में कविता की कोमलता थी और निर्णयों में हिमालय सा दृढ़ संकल्प जब संसद में अटल जी बोलते थे,तो शब्द नही इतिहास खड़ा होता था विरोधी भी सुनते थे,क्योंकि वे सच बोलते थे देश के लिए, देश के हित में “मैं भारत की बात करता हूँ”यह उनका नारा नहीं, उनका जीवन था पोखरण की धरती जब गूँजी, तो दुनिया ने जाना—भारत अब चुप रहने वाला राष्ट्र नहीं,बल्कि आत्मसम्मान से खड़ा हुआ राष्ट्र है अटल जी ने राजनीति को सेवा बनाया,
सत्ता को साधन माना,और राष्ट्र को सर्वोपरि रखा।
वे कहते थे—“सरकारें आएँगी-जाएँगी,लेकिन देश रहना चाहिए वे कवि थे,इसलिए संवेदनशील थे।वे राष्ट्रवादी थे,
इसलिए अडिग थे।वे भारतीय थे,इसलिए मानवता के पक्षधर थे।आज जब हम उन्हें याद करते हैं,तो सिर्फ एक प्रधानमंत्री नहीं,बल्कि एक युग को नमन करते हैं।
आइए संकल्प लें—कि हम अटल जी के विचारों को
सिर्फ स्मारकों में नहीं,अपने आचरण में उतारेंगे।
क्योंकिअटल बिहारी वाजपेयी अमर हैं—अपने विचारों में,अपने कर्मों में,और भारत माता के हृदय में।
अगर एक सच्चा देशभक्त और नेता हो तो
वो पंडित अटल बिहारी वाजपाई जैसा होना चाहिए!
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




