साहित्य

रुहेला का शौर्य इतिहास

कुलदीप सिंह रुहेला

रुहेला नाम है, शान है, स्वाभिमान की बात,

रण में भी मुस्काए जिसमें है, वही हमारी जात।

इतिहास की धड़कन बोले, रुहेला कभी न हारा,
आँधी आई, तूफान आए, झुका नहीं हमारा सितारा।

सहारनपुर का किला कहे, पत्थर-पत्थर साक्षी है,
रुहेलों के साहस की हर ईंट में अब भी आग बाकी है।

महाराजा रणवीर सिंह रोहिल्ला का वो अभिमान है,
चौक पे खड़ा ललकारे, यही वीरों का हिंदुस्तान है।

न्याय, शौर्य, बलिदान यही तो पहचान हमारी है,
मिट्टी के कण-कण में बसी है यही गाथा न्यारी हैं।

ना तलवार सिर्फ़ हाथ में, दिल में भी अंगार है,
रुहेला जब जब उठ खड़ा हुआ तो , कांपे अत्याचार है।

एकता का कवच पहन कर , आगे बढ़ते जाएँ है,
भाईचारे की मशाल से,चलो हर अँधेरा जलाएँ।

रुहेला नाम अमर रहे, यही प्रण यही गान है,
शौर्य, सम्मान, एकता में यही हमारी जान है ।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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