साहित्य

सुशासन दिवस पर विशेष

गोविन्द सूचिक

युग पुरूष.. अटल बिहारी वाजपेई के जन्म दिवस पर
..अटल काव्यांजलि…

अटल इरादा रखने वाले,
तूफानो से नहीं घबराते!
मुश्किले आएगी और चली जाएगी,
चाहे घनघोर घटाएं,
अंतर्मन के दीपक को बुझने मत देना!
कठिन डगर हो जीवन की,
कदम नहीं डगमगाते!
सागर की लहरों के आगे,
कभी शीश नहीं झुकाते!
आंधिया आएगी और चली जाएगी,
पर डोरी दिल की थामे रखना!
वक्त के साथ चलने वाले,
कभी आंसू नहीं बहाते!
कर्म पथ पर चलने वाले,
शौहरत की गाथा गाते!
नेकी का इरादा हो जीवन‌ में,
राहें चाहे कितनी भी कठिन‌ हो,
शौहरत की मंजिल पाते!
परिणाम चाहै जो भी हो,
भरोसा ना खो पाते!
बिना परिश्रम किए बिना,
यश‌ केसे? पा जाते!
अटल इरादा रखने वाले,
तूफानो से नहीं घबराते!
तूफानों से नहीं घबराते!
संघर्षों की भट्टी मे तप कर,
कनक समान निकलना होगा!
जो नर झुकता नहीं समय के आगे,
उसी का गीत इतिहास लिखेगा!
(गोविन्द सूचिक हरदा मध्यप्रदेश)

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