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वह लड़की ,याद आती है ,भाग 2

डॉ रामशंकर चंचल

वह लड़की ,याद आती है ,भाग 2
वह लड़की
याद आती है अक्सर
जो देखते ही देखते
किशोरी हो गई थी
अब वह शर्माती है
अपने वह
लड़कों के साथ भी
बत्तियाती
खेलती हैं , मुस्काती है
अब स्कूल में
फर्राटे से गिनती
पहाडे बोलतीं है
गाती है संध्या गीत
बनती हैं खुद संध्या
दौड़ जाती हैं
अकेली है
भयावह जंगी में
निडर और बेबाक
उठा लेती हूं
हैड पंप से पानी का
बड़ा सा भरा मटका
अब वह पहले की तरह
चुलबुली नहीं है
कभी कभी बहुत
शांत और गम्भीर भी
दिखाई देती है
जैसे कूच सोच रही हैं
वह लड़की कितनी जल्दी
देखते ही देखते
समझदार हो गई
सोचता हूं
उम्मीद सब कुछ
सिखा देती है
कुछ ज्ञान, कुछ,सही गलत
अब वह स्कूल में
प्रशंसा करने पर
खुश हो जाती हैं
और कमी बताने पर
दुःख लिए होता हैं
अब वह स्कूल में
अपनी साख को बनाने में
अकसर खूब पड़ती हैं
पहले की तरह
मस्ती और व्यर्थ घूमना
नहीं चाहती है
अब वह जरा सा भी
किसी अन्त लड़की की
प्रशंसा कर देने पर
परेशान हो जाती हैं
और खुद लग जाती हैं
इस प्रशंसा को ,अपने पक्ष में
करने के लिए
सोचता हूं अक्सर
स्वतं जन्म लेने लगते है
अक्सर माननीय
प्रवृत्ति या नारी के यर्थाथ जीवन
के यह लक्षण
कितना कुछ बदल जाता है
उम्र के साथ साथ
सब कुछ,
सचमुच अद्भुत ईश्वरीय शक्ति है
जिसने नर और नारी को
जन्म दिया
खैर, वह अब अच्छी तरह
तैयार हो कर
स्कूल आती हैं
और सदा ही किताबों में
उलझी रहती हैं
वह लड़की याद है
पांचवीं में
पूरी तहसील में
प्रथम आई थी और
उसका शाला में
और तहसील स्तर पर
समान हुआ था
तब से उसने ठान लिया था
ओर खूब मेहनत करेगी और
जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करेगी
लगी रहती थी
सदा ही पढ़ने में
कितनी गम्भीर हो गई थी
किशोरी अब
कितनी अजीब ऊर्जा और
आत्मा विश्वास से पढ़ रहीं थी
घर के कितने ही काम को
मां का साथ देते हुए
पूरा करने के बाद
रात वो अक्सर
अपना झोपडी में
लालटेन की रौशनी में
पढ़ा कृति थीं
जब तक घड़ी नींद नहीं आती
पढ़ती रहती थी
किशोर उम्र में ही
उसके भीतर कुछ कर गुजरने
की चाह जन्म लिए थीं
अकसर वह और की बात,सुनती
तो खुद को भी वहां देखती
मैं भी खूब पढ़ कर
यह बनेंगी ताकि
मां और पिता को
जिन्होंने मुझे सदा साथ दे
पढ़ाया उन्हें भी अच्छा लगे
और उनको भी सूख सुखद मिले
वह लड़की अक्सर यह सोचती
और एक दिन उपलब्धि और उपलब्धि हासिल कर
देखते ही देखते बढ़ी हो गई
वह लड़की सचमुच
अद्भुत उर्जा और आत्मा विश्वास से
अपने जीवन को सार्थक
मुकाम की और ले जाती रही
वह किशोरी, कितनी
जल्दी समझा गई थी
खुद के जीवन का
अर्थ और ईश्वर कृपा से
मिले अनमोल उपहार
मानव जीवन को
वह लड़की
याद आती है
अक्सर जो किशोर उम्र में ही
कितनों की प्रेरणा स्रोत
बन गई थी
वह लड़की
मेरे गांव की
अपनी जन्म भूमि को
सार्थक कर रही थीं
और आज वह लड़की
सारे जिले में
कक्षा आठवीं में
प्रथम स्थान प्राप्त कर
स्कूल का, गांव का
और अपनी तहसील का
नाम कर दिया था
वह लड़की
याद आती है
जिसने अपने सत् कर्म से
निष्ठा और आत्मा विश्वास से
सफलता प्राप्त कर
गांव का नाम कर दिया था
वह लड़की
याद आती है
जो अपनी इस अद्भुत सफलता पर
मेरा चरण स्पर्श कर
उसका श्रेय मुझे दे रही थी
इसकी सारी अद्भुत साधना और तपस्या का श्रेय वह आज
अपने माता पिता को और
सभी गुरुजनों को
दे कर बेहद प्रसन्न थीं
सोच रहा था
शिक्षा कितना कुछ
सिखा जाती हैं
स्वतं ही सभी के प्रति
सादर और सम्मान
आदि आदि सैकड़ों
अच्छी बात

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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