यूपी

आर.एस. इंटर कॉलेज में 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया

दिनेश पाल सिंह 'दिव्य'

चंदौसी। आर.एस. इंटर कॉलेज में 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। मंच पर अनेक सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय कार्यक्रम हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य एस.के. अग्रवाल एवं जायंट्स ग्रुप आफ चन्दौसी वेस्ट के पदाधिकारी गणों ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया उसके पश्चात मां शारदे के समक्ष पंचमुखी दीप प्रचलित किया।

गणतंत्र दिवस पर प्रधानाचार्य ने कहा,”आप सभी को 76वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज का दिन हमें याद दिलाता है कि भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि संविधान, संस्कृति और चेतना से बना एक जीवंत राष्ट्र है।
15 अगस्त ने हमें स्वतंत्रता दी, और 26 जनवरी ने उस स्वतंत्रता को संविधान की मर्यादा प्रदान की।
हमारे संविधान ने हमें अधिकार दिए,
लेकिन उससे पहले कर्तव्य का पाठ पढ़ाया।
आज एक शिक्षण संस्था के रूप में हमारा संकल्प है कि हम केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि संविधानधारी नागरिक तैयार करें—
जो ज्ञान के साथ चरित्र, और सफलता के साथ संवेदनशीलता रखें।
प्रिय विद्यार्थियों,
राष्ट्र का भविष्य सीमा पर नहीं,
कक्षा-कक्षों में गढ़ा जाता है।
आपका अनुशासन, आपकी मेहनत और आपका नैतिक बल—
यही भारत की असली शक्ति है।
आइए, इस गणतंत्र दिवस पर हम सब मिलकर यह प्रण लें कि
हम संविधान का सम्मान करेंगे,
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखेंगे
और भारत को केवल महान अतीत नहीं,
उज्ज्वल भविष्य भी देंगे।
संविधान की स्याही से लिखा स्वाभिमान है,
हर नागरिक के हृदय में बसता हिंदुस्तान है।
न अधिकारों का घमंड, न कर्तव्यों से पलायन—
यही गणतंत्र का सच्चा सम्मान है।
अन्त में जय हिन्द जय भारत 🇮🇳
वन्दे मातरम् वन्दे भारत 🇮🇳 कह कर कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम में विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(1)क़ानून की चौखट पर जो न्याय को रखता है,
वही गणतंत्र की असली इज़्ज़त करता है।
जहाँ अधिकार कर्तव्य से जुड़ जाएँ,
वही देश सच में आगे बढ़ता है।
(2)यह तिरंगा नहीं, त्यागों की कहानी है,
हर रंग में शहीदों की ज़ुबानी है।
गणतंत्र दिवस सिखाता है इतना ही हमें,
राष्ट्र से बड़ी कोई पहचान नहीं है।
(3)संविधान की स्याही से लिखा स्वाभिमान है,
हर नागरिक के हृदय में बसता हिंदुस्तान है।
न अधिकारों का घमंड, न कर्तव्यों से पलायन,
यही गणतंत्र का सच्चा सम्मान है।
दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’

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