
सारी दुनिया में भारत की, हिन्दी है पहचान ।
बिंदी बनकर चमक रही है,यह भारत की शान ।
हिन्दी बोलो बड़े गर्व से, रखती सबका मान ।
सारी दुनिया में भारत की, हिन्दी है पहचान ।।
वीरों की हुंकार यही है,जन-गण-मन का गान ।
वीणा की झंकार बसी है, माॅं वाणी की तान ।
माॅं की लोरी भाषा हिन्दी, संतों का है ज्ञान ।
सारी दुनिया में भारत की, हिन्दी है पहचान ।।
तुलसी-सूर-कबीर -निराला, मीरा की झंकार ।
पंत- प्रसाद- महादेवी की, वाणी करे शृंगार ।
कुरूक्षेत्र में ‘दिनकर’ करते, शब्दों का संधान ।
सारी दुनिया में भारत की, हिन्दी है पहचान ।।
स्वर-व्यंजन संघात अनोखा, बहती अमृत धार ।
शब्द शक्तियाॅं और व्यंजना,अनुपम वाणी सार ।
हिन्दी है पहचान हमारी, हिन्दी ही अभिमान ।
सारी दुनिया में भारत की, हिन्दी है पहचान ।।
*🌹विश्व हिन्दी दिवस पर वंदनीय रचना🌹*
रमेशचन्द्र द्विवेदी
हल्द्वानी-नैनीताल
दिनांक:-10/01/2026.
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