आलेख

जन्म जीवन मूल्यों के कर्मयोद्धा स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी स्मृतियों की दिशा दृष्टि दृष्टिकोण

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी की जीवन गाथा एक प्रेरणादायक कहानी है जो हमें जीवन के कठिन चक्र से मुक्ति की ओर ले जाती है।

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी का जन्म उत्तर प्रदेश पूर्वांचल के गोरखपुर जनपद में सरयू के सानिध्य अहिरौली में हुआ था,उस काल समय में हुआ था
जब आर्यब्रत में मलेक्छ कि
लम्बी गुलामी से स्थानांतरण होकर गुरुण्ड कि गुलामी से अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत था।

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी कि शिक्षा दीक्षा ग्रहण करना सामान्य ब्राह्मण कृषक परिवार के युवक के लिए तत्कालीन समय में कठिन चुनौती थी, लेकिन उन्होंने सीमित संसाधन के बावजूद प्राप्त अतिसीमित संसाधन सुविधा का उपयोग शिक्षा प्राप्त करने में किया।
शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत सन उन्नीस सौ बसाठ में उत्तर रेलवे में सहायक स्टेशन मास्टर का पद भार ग्रहण कर राष्ट्र एवं समाज सेवा के जीवन कर्म अनुष्ठान का शुभारम्भ किया।

सहायक स्टेशन मास्टर के रूप में मुरादाबाद मंडल बिभिन्न स्टेशनो पर कार्य करते हुए बैंक एंड मूमेंट इंस्पेक्टर के रूप में महत्वपूर्ण कार्यों को परिणाम तक पहुंचाया, जिससे वास्तविकताओ एवं सच्चाई क़ो देखने का अवसर मिला।

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी के अथक प्रयास के परिणाम में लक्सर उपभोक्ता एवं विक्रेता सहकारी समिति समाज कि उतपत्ति हुई, जिसके द्वारा स्थानीय समाज क़ो आत्म निर्भर बनने में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया गया!

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी की जीवन गाथा हमें यह सिखाती है कि कठिनाइयों का सामना करने से हम मजबूत बनते हैं और प्रयास से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी की जीवन गाथा एक प्रेरणादायक कहानी है जो हमें जीवन के कठिन चक्र से मुक्ति की ओर ले जाती है।
उत्तर रेलवे में के नार्दन रेलवे के मजदूर संगठन नार्दन रेलवे के मेंस यूनियन के बिभिन्न संगठनिक दायित्वों का निर्वहन गुरुता गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ करते हुए स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी केंद्रिय उपाध्यक्ष के उच्च दायित्व क़ो मर्यादित एवं सुशोभित किया।

वर्ष 1974 में राष्ट्र व्यापी रेल हड़ताल में उन्होंने धर्मेव जयते, कर्मेव जयते, सत्यमेव जयते के कुरुक्षेत्र मे भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए गीता सन्देश क़ो आत्म साथ करते हुए दृढ़ता साहस एवं धैर्य का परिचय देते हुए सब्जी बेचकर एवं ट्यूशन पढ़ा कर आपने बच्चों कि शिक्षा क़ो नियमित रखते हुए परिवार का भरण पोषण करने कि जिम्मेदारी का निर्वहन किया गया।

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी ने अपने छोटे भाई स्व रामअनंत क़ो पढ़ाया और इंजीनियर बनाया, आपने साले राम प्रताप मिश्र क़ो रेलवे में सेवारत होने का शुभ अवसर प्रदान करने में अहं भूमिका का निर्वहन किया।

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी कि धन्य धरोहर उपलब्धियों मे
अपनी बहन के सुपत्र भांजे ब्रह्मानंद तिवारी क़ो बी एस सी एवं बी एम एस कि शिक्षा आपने पास रखकर आपने खर्चे से पूर्ण करना बड़े साले के पुत्र डॉ प्रमोद पाण्डेय कि शिक्षा में सहयोग किया जो आर्थिक, सामयिक, वैचारिक पूर्णता सम्पूर्णता के साथ था।

स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी की जीवन गाथा हमें यह सिखाती है कि कठिनाइयों का सामना करने से हम मजबूत बनते हैं और हमारे प्रयास से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

मुझे विश्वास है कि स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी के पीढ़ी परिवार द्वारा उनके जीवन मूल्यों क़ो जीवंत जाग्रत रखते हुए समय समाज काल समय में उनकी कीर्ति पताका क़ो अम्बर में अभिमानित होने का अवसर प्रदान करने का अनवरत पराक्रम
किया जाता रहेगा यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होंगी!

*स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी के जीवन से सीखें:*
– दृढ़ता और साहस के साथ कठिनाइयों का सामना करें।
– अपने परिवार और समाज के प्रति संवेदनशील रहें।
– अपने मूल्यों और आदर्शों को कभी न छोड़ें।
– जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत रहें।

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!

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