साहित्य

कविता

डॉक्टर रुप कुमार बनर्जी

सर्द हवा का चल रहा तेज़ झोंका,
गलन से रात हुई है और भी बोझा।
ठिठुर रहा तन, कांप रहा प्राण,
अपनी सेहत का रखें पूरा ध्यान।

अलाव सुलगता,अंगीठी बुलाती,
हीटर ब्लोअर गरम हवा पहुंचाती
पर याद रहे, ज्यादा गरम ज़्यादा धुआँ
फेफड़ों को गहरा घाव पहुंचाती।

ठंड में अक्सर बढ़ती लापरवाही,
देर रात जागना बनता तबाही।
नींद पूरी न हो जिस रात,
बीमारी दे जाती अपनी सौगात।

भूख बढ़ी तो तला–भुना,
प्लेट में आए मसाले घना।
पर सूप, दलिया, सादा खाना ही अपनाएँ,
अपनी प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाएँ।

नाक, गला,कान अपनी बचाइए,
मफलर–टोपी ज़रूर लगाइए।
सुबह घर पर ही करें हल्का व्यायाम,
सर्दी में बनें ये अमृत धाम।

ठंड भयानक है, सच मानिए,
पर डरे नहीं, समझ अपनाइए।
सावधानी ही है असली दवा,
स्वस्थ रहेगा हर घर हर परिवार सदा।

डॉक्टर रुप कुमार बनर्जी। होम्योपैथी चिकित्सक

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