
यह ज़िन्दगी भी कितनी अजीब है
क्यों स्वार्थ पर टिके रहना मजबूरी है!!
बहुत से लोग हमें पसंद नहीं
आपकी ज़र्रा-नवाज़ी भी ख़ूब है!!
एक अरसा हुआ बिछड़े हुए
एक मुद्दत से यह दिल ग़म में चूर है!!
आपका आना कोई बड़ी बात नहीं
हम तो कहते नहीं,कि आप मग़रूर है!!
फ़ुर्सत मिले तो दिल का हाल जान ले
दिल की तरह हम भी नशे में चूर है!!
हम ख़्याल मेरे आप क्या होंगे
आपके तो खुद बड़े क़सूर है!!
ज़िन्दगी भी अजीब है ना
ज़ेहन के जो क़रीब वही शख़्स दूर है!!
हमको वादा तोड़ना नहीं आता
आप दिल तोड़ने में बड़े मशग़ूल है!!
अब और कितना वक़्त चाहिए
शायद आपसे कहना हमारी भूल है!!
बड़ी शिद्दत से चाहा है तुम्हें
क्या तुम्हें हमारी मोहब्बत क़ुबूल है…
– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




