साहित्य

शाम का आवरण

ममता झा मेधा

सुनहरी रोशनी फीकी पड़ने लगती है,
एक शांतिपूर्ण सन्नाटा सूरज को ढंकती है।
बादल करीब आते हैं एक गहरा साया छाता,
गोधूलि बेला रात आने का संकेत देती है।

आसमान का रंग बदलने लगता है,
जैसे ही शाम दिन पर हावी होता है।
धीरे धीरे तारे भी टिमटिमाने लगते हैं,
आकाश में फिर चांदनी रात होता है।

जैसे ही रात अपना हाथ बढ़ाती है,
पेड़ों के बीच से हवा गुनगुनाती है।
विशाल आकाश रात को गले लगाया,
शाम का आवरण सूरज को विदाई देती है।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज

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