
संक्रांति पर्व संक्रांति
सूर्य उत्तरायण
आ जाती कांति ।१।
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आती संक्रांति
आयेगा बसंत भी
रही न भ्रांति ।२।
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संक्रांति पर्व
स्नान ध्यान दान का
हिंद को गर्व ।३।
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हरेक जुड़ें
मकर संक्रांति हो
पतंगें उड़ें ।४।
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संक्रांति पर्व
करें खिचड़ी भोग
होता है गर्व ।५।
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संक्रांति आती
गजक मूँगफली
सबको भाती ।६।
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संक्रांति आये
मानवता जगाये
प्रेम सिखाये ।७।
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संक्रांति पर्व
मिलते रहें सर्व
न करें दर्प ।८।
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मन हो शांत
मकर संक्रांति से
बढ़े वेदांत ।९।
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मौसम शीत
बदले संक्रांति से
ऊर्जा हो मीत ।१०।
-राम किशोर वर्मा
रामपुर (उ०प्र०)
दिनांक:- १४-०१-२०२६ बुधवार




