साहित्य

गीत सृजन  मुखड़ा

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

तपती धरती बाट निहारे, घिर आओ घनश्याम।

सूने नभ में आस जगी है, लेकर तेरा नाम॥

 

खेत बाग वन धरती सूखी , प्यासी हर इक डार।

पनघट सूने, नदियाँ रोतीं, व्याकुल है संसार।।

चातक नयनों में प्रतीक्षा, कोयल हुई निष्काम।

जीवनदायी अमृत बरसाओ, सुन लो करुणा-ग्राम।।

तपती धरती बाट निहारे, घिर आओ घनश्याम।

सूने नभ में आस जगी है, लेकर तेरा नाम॥

 

धूल भरी इन राहों पर अब, बिछी विरह की रेत।

अब किसान कीआँखों में हैं, सपनों वाले खेत।।

हरियाली का गीत सुनाओ, मिटे धरा का घाम।

रिमझिम बारिश से भर दो अब , जीवन का हर धाम।।

तपती धरती बाट निहारे, घिर आओ घनश्याम।

सूने नभ में आस जगी है, लेकर तेरा नाम॥

 

पीपल, बरगद, नीम पुकारें, दो फिर शीतल छाँव।

पशु-पक्षी सब राह निहारें, महके अपना गाँव।।

प्रेम सुधा की वर्षा करके, दो जग को विश्राम।

दया-मेघ बन कर बरसो तुम, हे करुणा-अविराम।।

तपती धरती बाट निहारे, घिर आओ घनश्याम।

सूने नभ में आस जगी है, लेकर तेरा नाम॥

 

आओ मिलकर वृक्ष लगाएँ, रखें प्रकृति का मान।

जल-संरक्षण का संकल्पित, हो हर जन अभियान।।

संतुलित हो सृष्टि हमारी, यही सभी का काम।

मंगलमय हो जग का जीवन, गूँजे तेरा नाम।।

तपती धरती बाट निहारे, घिर आओ घनश्याम।

सूने नभ में आस जगी है, लेकर तेरा नाम॥

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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