
गीत _पड़ गये ,होली के रंग फीके
पड़ गये ,होली के रंग फीके।
रिश्ते हो गये,तार-तार,
ना अदबी रहे सलीके।
पड़ गये,होली के रंग फीके।
जवाँ अगर बेटी हो जाये।
कामी बाप पाप पर आये।।
आस पास उसके मँडराये,
कभी दुपट्टा खींचे।
पड़ गये ,होली के रंग फीके।।
सुनसान सड़क पर जब कोई मिल जाये अबला नारी।
कौन कहाँ से कब आ जाये,बन करके व्यभिचारी।।
हो जाता दिल लहूलुहान,कही पड़े खून के छींटे।
पड़ गये ,होली के रंग फीके।।
चाहे कितना प्यार लुटाये।
पति को पत्नी रास ना आये।।
रोज-रोज की मार वो खाये ,
जैसे काल पड़ा पीछे।
पड़ गये ,होली के रंग फीके।।
जब बेटी ससुराल में जायें।
लोभी दहेज के मन ललचायें।।
तरह-तरह से उसे डरायें,ना कोई हिमाती दीखे।
पड़ गये ,होली के रंग फीके।
पड़ गये ,होली के रंग फीके।
रिश्ते हो गये,तार-तार,
ना अदबी रहे सलीके।
पड़ गये,होली के रंग फीके।
सुन्दर लाल मेहरानियाँ_ राजस्थानी




