
#मेरी राधा कृष्ण दुलारी सबकी है आँखों की प्यारी,
बरसाने की रज में बसती छवि जिसकी लगती न्यारी।
मोर मुकुट के स्वामी श्याम भी जिन पर प्रेम लुटाते हैं,
राधा नाम जपते-जपते अपने को धन्य बताते हैं।
राधे-राधे गूँजे जग में ऐसा मधुर तराना है,
जिसने राधा को अपनाया उसने जग को जाना है।
करुणा की वह निर्मल गंगा प्रेम सुधा की धारा है,
भटके मन को राह दिखाए, ऐसा उनका सहारा है।
चरणों की धूलि मिल जाए, जीवन सफल हो जाए रे,
राधा नाम की ज्योति जले तो मन का तम मिट जाए रे।
भक्ति के उपवन में खिलती वह अनुपम सी फुलवारी,
मेरी राधा कृष्ण दुलारी, सबकी है आँखों की प्यारी।
जय-जय राधे, जय-जय राधे, गूँजे हर घर-द्वारे में,
प्रेम, दया और शांति बरसें, उनके पावन नज़ारे में।
राधा नाम अमृत का सागर, कृष्ण प्रेम पतवार बने,
जिसके हृदय विराजें राधा, उसके सब उद्धार बने।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




