
जातिवाद बन गई देश में राजनीति की हथियार
समाज के उपर लटक गई भेद भाव की तलवार
बाँट रहा है समाज को ये शहर गाँव और जवार
ना समझी की हो गई अब समझो सीमा पार
प्राचीन भारत में नहीं था जातवाद का दस्तुर
राजनीति ने उपजा दी जात पात की नासुर
लड़ा रहा है समाज को विदेशी है शत्रु का शूर
सत्ता पे काबिज होने की ये चाल है मेरे हुजूर
कालनेमी बन बैठा है समाज का नया ठेकेदार
हर मोड़ हर नुक्कड़ पर हो रहा इनका। व्यापार
बहुत ही गहरी पैठ बना ली है देश के गद्दार
इन के षड़यंत्र से कैसे बच पाओगे मेरे सरकार
विकास की पथ का ये सब है खड़ा है बन बाधक
जनता को मूरख बना रहा है ये बन कर सब साधक
देश को बाँटने के लिये बजा रहा है। तबला वादक
मूर्ख का ये सब मंच पे बैठा कथा का नया वाचक
जातिवाद का करो अब सब् मिलकर करो बहिष्कार
समानता का है सब जन को देश में मिला अधिकार
मिटा दो समाज में जात पात का ये फैला अंधकार
सुकर्म का है एक मानव जाति का नया संसार
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार




