साहित्य

खुद करो प्रतिकार

उदय किशोर साह

उठो मेरी बहना   अपनी आँसू पोछो
कलियुग में कोई    कान्हा ना आयेगा
हर नुक्कड़ पे   खड़ा दीख रहा शैतान
तेरी मजबूरी की वो  फायदा उठायेगा

अंधी हो गई दुनियां  बहरी है जमाना
झूठा बजता है   जग में प्रेम     तराना
हर कोई शोषण का   बना है    पुतला
स्वार्थ में बेरहम हो    गई है आबूदाना

खुद की लड़ाई अब खुद  ही है लड़ना
घात की प्रतिघात को है तुम्हें अपनाना
जो तुमपे नजर की गर कोई       डाले
सबक  उसे उसकी भाषा में  समझाना

प्रतिकार की      तुम बन जाना अब देवी
तुम हो दुर्गा    तुम ही        हो माँ काली
झाँसी की रानी     बन जा मेरी     बहना
खुद से करो तुँ अपनी   इज्जत रखवाली

जब जब नारी पे हुई जग में       अत्याचार
महाभारत की घटना कब कोई रोक पाया है
माँ बहना की अस्मत   पे जब आँच आया है
दानव कुत्ते की     मौत रण में वो     पाया है

अपनी आबरू अब खुद ही है  तुम्हें बचाना
खुद को फौलादी अब बन कर है दखलाना
खुद बन जाओ अब न्याय की तुँ एक मूरत
सुधर जायेगा राक्षस का ये जालिम पैमाना

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार

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