साहित्य

क्यों आदमी आदमी से दूर होता जा रहा है

एस के कपूर"श्री हंस"

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आदमी आदमी से दूर क्यों होता जा रहा है।
क्यों बात -बात में आपे से बाहर होता जा रहा है।।
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सारे वादे – दावे संबंध एक झटके में तोड़ देता है।
स्वभाव समझदारी को एक गलत मोड देता है।।
कर समय का दुरूपयोगआदमी रोता जा रहा है।
आदमी आदमी से क्यों दूर होता जा रहा है।।
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स्नेह संवाद का धागा अहम में ही टूट गया है।
क्षमादान भी व्यवहार में कहीं पीछे छूट गया है।।
आदमी के गुण नहींअवगुण को कोसता जा रहा है।
आदमी आदमी से क्यों दूर होता जा रहा है।।
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वजह-बेवजह बेबात नाक की लड़ाई बना देता है।
देकर हवा हर बात इज्जत पर चढ़ाई बना देता है।।
जाने क्योंआदमी नफरत से भरपूर होता जा रहा है।
आदमी आदमी से क्यों दूर होता जा रहा है।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।

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