
तुम्हारे बिन सुना सा लगता मेरा सारा संसार है,
मेरी हर एक आती जाती सांस में बस तुम्हारा ही प्यार है।
तुम चांदनी की शीतल आस हो और उगते सूरज का तेज तुम,
मेरे जीवन के हार और और हर संगीत का अनमोल सहेज तुम।
फूलों की कोमल मुस्कान और सावन के झोंको सा एहसास हो,
तुमसे ही शुरू होती खुशियां तुम ही हर पल मेरे पास हो।
सागर की अनंत लहरों की चंचल और गहरी तुम्हारी याद है,
मेरे इस तड़प के दिल को सुकून देती तुम्हारी ही मीठी फरियाद है।
मैंने पूर्णत: समर्पित कर दिया तुझको अपने जीवन का उजास,
अनंत “आकाश” की गहराइयों सा अटूट और अमिट मेरा विश्वास,
तू ही मेरी धड़कन की हलचल है तू ही रोक सबसे खास।
मोन की गहराइयों में भी गूंजती बस तुम्हारी ही रूहानी पुकार है,
मेरी रग रग में लहू बनकर दौड़ता तुम्हारा ही पावन इकरार है।
जैसे मंदिर की चौखट पर जलता दिया और चंदन की महक साथ है,
प्रार्थना है प्रभु से ता उम्र बना रहे हाथों में बस तुम्हारा ही हाथ है।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




