
1
ज्ञान बुद्धि विनम्रता हमारे आभूषण हैं।
सत्यवादिता प्रभु आस्था हमारे भूषण हैं।।
राग द्वेष कुभावना वरण नहीं करना।
ईर्ष्या और घृणा कुमति और दूषण हैं।।
2
आत्म विश्वास से खुलती सफल राह है।
सब कुछ संभव यदि जीतने की चाह है।।
व्यवहार कुशलता ही बनतीउन्नति साधक।
बाधक बनती हमारी नफरत और डाह है।।
3
मत पालो क्रोध ये प्रतिशोध बन जाता है।
मनुष्य स्वयं जलता औरों को जलाता है।।
प्रतिशोध का अंत पश्चाताप से ही है होता।
कभी व्यक्ति प्रायश्चित भी नहीं कर पाता है।।
4
विचार आदतों से ही चरित्र निर्माण होता है।
इसीसेआपका व्यक्तित्व चित्र निर्माण होता है।।
तभी बनती हैआपकी लोगों के दिल में जगह।
गलत राह पर केवल दुष्चरित्र परिणाम होता है।।
5
बस छोटी सी जिंदगी प्रेम लिए भी कम है।
नफरत बन जाती जैसे लोहे की जंग है।।
बदला लेने में बर्बाद नहीं करें इस वक्त को।
आपका सही रास्ता ही लायेगा सफलता रंग है।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।




