
भक्ति भाव को रख हृदय में,कभी भजन को गाया तुमने
दर्द भरे नगमे कभी गाए, कभी प्रेम बरसाया तुमने ।
मधुर स्वरों की सुर लहरी से, कितनी ही शामों को सजाया,
देश-विदेश में संगीत, मुक्तक सा बिखराया तुमने ।
ताल,लय,सुर,छंद की मलिका, हर एक साज सजाया तुमने
स्वर साधिका मौन हुई अब,हर दिल को भरमाया तुमने
कंठ कोकिला मधुरिम गायन,सुधियों का उपवन महकेगा
हो जीवंत हर धड़कन में, हर दिल को धड़काया तुमने।
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश




