
नारी घर की आन, बान ,शान होती है।
नारी के बिना घर सुना- सुना सा रहता है।
नारी घर की श्रृंगार है।
नारी घर का संचालन करती है।
नारी सामाजिक दायित्व को बेखुबी से निभाती है।
नारी का धार्मिक संस्कारों में भी सर्वोच्च स्थान रहता है।
नारी के कई रूप हैं मां का रूप ,बेटी का रूप, देवी का रूप, पत्नी का रूप।
नारी से घर का आंगन महकता है।
नारी से घर में खुशहाली आती है।
नारी से घर में सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है।
नारी पुरुष का गहना होती है।
पुरुष को नारी से हिम्मत मिलती है।
नारी का भारत में सम्मान का रूप मानते हैं।
सुरेन्द्र कुमार बिन्दल (कलमकार) जयपुर।



