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प्रभु की दी जिंदगी हर कदम फर्ज मांगती है।
जिओ बन कर इंसान यही तर्ज मांगती है।।
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जीवन यात्रा विवेक,सुभावना,सहयोग चाहती है।
प्रेम से ही प्रेम मिलता कि बस यही जानती है।।
अनमोल जन्म से मिली जिंदगी कर्ज मांगती है।
प्रभु की दी जिंदगी हर कदम फर्ज मांगती है।।
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ईश्वर ने दुर्लभ मानवजीवन दिया कुछ करने लिए।
जीवन मूल्य समझ किसी का दुःख हरने लिए।।
घृणा मूल से हो समाप्त मानवता यहीअर्ज मांगती है।
प्रभु की दी जिंदगी हर कदम फर्ज मांगती है।।
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मत तलाशते रहो दिनभर कल किआज चला जाए।
वही रहता सुखी जो हर पल सबका भला हो चाहे।।
यह जिंदगी हर किसीके लिए प्रेमरोग मर्ज मांगती है।
प्रभु की दी जिंदगी हर कदम फर्ज मांगती है।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।




