साहित्य

अब काहें पछताएं, जब चिड़िया चुग गई खेत

रिया राणावत

लेना हुआ स्वास है मुश्किल,
अब समझ नहीं आ रहा कैसे करें चिल।।
हवाएं दूषित ,
पानी प्रदूषित।।
केमिकल ने सबसे किया चीट,
पेट्रोल की गाड़ियों ने , बंद की साइकिल।।
अब कहे चिल्लाए,
जब खुद बच्चा ना पाए।।
समुद्र का खार पानी ,
होने लगा दूषित ।।
नदिया भी सुखी ,
और त्वचा भी रुखी।।
बिन मौसम बरसात ने बिगाड़ दी है फसलें,
पृथ्वी दिवस के नाम पर नेता खा रहे झूठी कसमें ।।
गाड़ियों के शोरों से ध्वनि प्रदूष,
ओर इधर ध्वनि भानुशाली गा रही दिलबर–दिलबर।।
मौसम के बदलाव का उड़ा रहे हैं मज़ाक ,
यू नहीं की कर दे कुछ सुधराव।।
ये कम नहीं की पृथ्वी है तो हम हैं,
ये कम नहीं की पृथ्वी है तो हम हैं।।
अगर मिट गया अस्तित्व पृथ्वी का ,
तो कहा जाएंगे हम,
मार्स पर खोज कारण से कुछ नहीं आएगा ,
पृथ्वी ना हुई तो मनुष्य संसार में नहीं टिक पाएगा।।
वृक्षों को कांट कर ,
सर पर बनाई छत ।।
अगर ना हु पेड़ धरती पर ,
तो कहा से लाएगा शीतल स्थल।।
बाद में पछताएगा ,
इतना करने के ना अब यह से कहा जाएगा ।।
पृथ्वी को ना कर नाराज़ मान्यवर,
अगर आया गुस्सा उसको तुम संसार में दिख नहीं पाओगे।।

एक ही धरती है ,
उन हम इत लोग ,
कर रह परेशान धरती को ,
अब कहे सुनो वो ,
अगर रिसा के ऑफ हुई वो ,
तो अपन सबको क्लास कर देगी वो ।।

ग्लोबलवार्मिंग की वजह से ,
सस्टेनेबिलिटी की बैंड बजा दी हमने।।
अब कहे पछताएं,
जब चिड़िया चूक गई खेत ।।

– रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!