
चप्पा-चप्पा इस धरती में, मिलकर पेड़ उगाये।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।
पर्यावरण हुआ संदूषित, पवन हुई जहरीली।
कथित प्रगति की भेट चढी, जीवन की रंगीली।।
जगह-जगह पर वृक्ष रोपकर, हरियाली को लाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(१)
धरती के हर संसाधन का, जमकर दोहन होता।
मानव की करनी के कारण, हर इक प्राणी रोता।।
अपनी काली करतूतो में, चलो कमी हम लाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(२)
पॉलीथिन तजकर कपड़े के , थैले उपयोग करें।
कूड़े के निस्तारण में कुछ, अपना सहयोग करें।।
चल देशी तौर तरीकों पर , खुशहाली को पाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(३)
वाहन सुविधा को कम करके, पैदल चलना होगा।
छोड़ मशीने कुछ कामों को, कर से करना होगा।।
सुख-सुविधाओं की कारा से, जीवन बाहर लाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(४)
निर्माणी का दूषित पानी, सरिता में मत डालो।
नदियों में कूड़ा भरने की, गंदी आदत टालो।।
तरल पेय की खाली बोतल, जल में नहीं बहाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(५)
अपने घर का कूड़ा कचरा, जहाँ-तहाँ नहिं फेकों।
पर्यावरण संरक्षण में अपनी, भागीदारी देखों।।
थोड़-थोड़ा कुछ कर-करके, अपना फर्ज निभाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(६)
अपने पुरजोर प्रयासों से, चेतावनी भरनी है।
वातावरण सुरक्षा में निज , हिस्सेदारी करनी है।।
छोटे- छोटे बदलावो से, निर्मल धरा बनाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(७)
#पवन कुमार सूरज
देहरादून
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