साहित्य

पर्यावरण-संरक्षण

पवन कुमार सूरज

चप्पा-चप्पा इस धरती में, मिलकर पेड़ उगाये।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।

पर्यावरण  हुआ  संदूषित, पवन  हुई  जहरीली।
कथित प्रगति की भेट चढी, जीवन की रंगीली।।
जगह-जगह पर वृक्ष रोपकर, हरियाली को लाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(१)

धरती के हर संसाधन का, जमकर दोहन होता।
मानव की करनी के कारण, हर इक प्राणी रोता।।
अपनी काली करतूतो में, चलो कमी हम लाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(२)

पॉलीथिन तजकर कपड़े के , थैले उपयोग करें।
कूड़े के निस्तारण में कुछ, अपना सहयोग करें।।
चल देशी तौर तरीकों पर , खुशहाली को पाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(३)

वाहन सुविधा को कम करके, पैदल चलना होगा।
छोड़ मशीने कुछ कामों को, कर से करना होगा।।
सुख-सुविधाओं की कारा से, जीवन बाहर लाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(४)

निर्माणी का दूषित पानी, सरिता में मत डालो।
नदियों में कूड़ा भरने की, गंदी आदत टालो।।
तरल पेय की खाली बोतल, जल में नहीं बहाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(५)

अपने घर का कूड़ा कचरा, जहाँ-तहाँ नहिं फेकों।
पर्यावरण संरक्षण में अपनी, भागीदारी देखों।।
थोड़-थोड़ा कुछ कर-करके, अपना फर्ज निभाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(६)

अपने पुरजोर  प्रयासों से, चेतावनी भरनी है।
वातावरण सुरक्षा में निज , हिस्सेदारी करनी है।।
छोटे-  छोटे  बदलावो से, निर्मल धरा बनाये।
*आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।*(७)

#पवन कुमार सूरज
देहरादून
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!