
विश्व पृथ्वी दिवस पर जन जागरूकता हेतु…..
है प्रकृति क्षरण अकूत, राष्ट्र की समस्या।
भू लगा विटप अनंत, हो गई तपस्या।।
है निसर्ग की पुकार, भूमि को सजाओ।
हो रही खराब वायु, देश को बचाओ।।
यह अजीब है विकास, जीव कुम्हलाया।
आदमी हुए अधीर, रोग ग्रस्त काया।।
तथ्य है विचारणीय, रोक लो तबाही।
विश्व के हितार्थ आज, बन हरित सिपाही।।
तापमान अस्त-व्यस्त, यह तपिश सताती।
है व्यथित असीम जीव, ग्रीष्म है डराती।।
सजगता विचार धार, पेड़ तो लगाओ।
दौर यह कठिन अतीव, सर्व को बताओ ।।
अब वसुंधरा खदान, से लगाव तोड़ो।
पूर्ण तंदुरुस्त चाह, तन्य भोग छोड़ो।।
कीजिये विलेय वस्तु, अब प्रयोग मानो।
मेदिनी रहे प्रफुल्ल, सत्य बात जानो।।
सुशीला फरमानिया ‘दीप्त’
संबलपुर, ओडिशा



