
ऐ भाई ज़रा देख के चलो,
रस्ते की हर एक चाल देखो।
ये सड़क नहीं, ये जाल बिछा,
सब ओर यहाँ जंजाल दिखा।
मुँह फेर के देखो, पीछे भी,
है कैसा ये बेहाल लिखा?
ऐ भाई, ज़रा देख के चलो!
सब स्क्रीन में खोए रहते हैं,
जो कहते हैं, वो कहते हैं।
कोई ‘लाइक’ पे मरता रहता है,
कोई ‘शेयर’ को ही सुख कहता है।
सच्चाई है कोसों दूर यहाँ,
दिखावे का ही सब खेल मचा।
ऐ भाई, ज़रा देख के चलो!
नेता जी भाषण देते हैं,
सब वादों को वो पीते हैं।
महँगाई पर अब मौन खड़े,
जुमलों की लड़ी में वो जड़े।
कुर्सी की खातिर बिकते हैं,
ईमान का देखो काल लिखा।
ऐ भाई, ज़रा देख के चलो!
सपनों की गाड़ी धीमी है,
महँगाई की ये आंधी है।
हर मोड़ पे कंकड़ बिछते हैं,
उम्मीद के फूल भी पिसते हैं।
आँखों पर पट्टी बाँध लो तुम,
यही आज का सुर-ताल लिखा।
ऐ भाई, ज़रा देख के चलो!
पूर्णिमा सुमन
झारखंड धनबाद



